तुम मिल गए तो मुझ से नाराज है खुदा, कहता है कि तू अब कुछ माँगता नहीं है।
जुड़ गई रूह तुझसे हो गई मुकम्मल मोहब्बत मेरी
रात होती है हर शाम के बाद, तेरी याद आती है हर बात के बाद, हमने खामोश रहकर भी देखा है तेरी आवाज आती है मेरी हर सांस के बाद।
रात गुमसूँ है मगर चेन खामोश नही कैसे कह दू आज फिर होश नही, ऐसा डूबा तेरी आखो की गहराई मैं, हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही
मेरे दिल ने जब भी दुआ माँगी है, तुझे माँगा है तेरी वफ़ा माँगी है, जिस मोहब्बत को देख के दुनिया को रश्क आये, तेरे प्यार करने की वो अदा माँगी है।
तेरे हुश्न पे कुर्बान हो जाऊ तेरी बाहों में बेजान हो जाऊ ऐसी नज़ाक़त है तेरी सूरत की की मै तेरा गुलाम हो जाऊ
तुम हशीन हो के गुलाब जैसी हो, बहुत नाजुक हो ख्वाब जैसी हो, होठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हे, सर से पाँव तक शराब जैसी हो।
ना महीनों की गिनती, ना सालों का हिसाब है.. मोहब्बत आज भी तुमसे बेइंतहां… बेहिसाब है.!
गुलाब जैसी हो, गुलाब लगती हो, हल्का सा भी मुस्कुरा दो तो, लाज़वाब लगती हो…
हर बार दिल से ये पैगाम आए; ज़ुबाँ खोलूं तो तेरा ही नाम आए; तुम ही क्यूँ भाए दिल को क्या मालूम; जब नज़रों के सामने हसीन तमाम आए.