कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है; कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है; कब तलक बयाँ करूँ दिल की बात; हर सांस में अब तेरा एहसास आ जाता है।
चेहरे पे मेरे जुल्फों को फैलाओ किसी दिन क्यूँ रोज गरजते हो बरस जाओ किसी दिन खुशबु की तरह गुजरो मेरी दिल की गली से फूलों की तरह मुझपे बिखर जाओ किसी दिन।
मंजिल भी तुम हो तलाश भी तुम हो उम्मीद भी तुम हो आस भी तुम हो इश्क भी तुम हो और जूनूँ भी तुम ही हो अहसास तुम हो प्यास भी तुम ही हो।
तेरे सीने से लगकर तेरी आरजू बन जाऊँ तेरी साँसो से मिलकर तेरी खुश्बू बन जाऊँ फासले ना रहें कोई तेरे मेरे दरमिआँ मैं…मैं ना रहूँ बस तू ही तू बन जाऊँ।
तेरा इश्क़ भी महंगाई की तरह है, दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।
न होके भी तू मौजूद है मुझमें क्या खूब तेरा वजूद है मुझमें
तेरे इंतज़ार में मेरा बिखरना इश्क़ है, तेरी मुलाकात पे मेरा निखरना इश्क़ है।
हक़ीक़त ना सही तुम ख़्वाब की तरह मिला करो, भटके हुए मुसाफिर को चांदनी रात की तरह मिला करो।
गर मेरी चाहतों के मुताबिक ज़माने की हर बात होती तो बस मैं होता तुम होती और सारी रात बरसात होती।
मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ।