ना महीनों की गिनती, ना सालों का हिसाब है.. मोहब्बत आज भी तुमसे बेइंतहां… बेहिसाब है.!
गुलाब जैसी हो, गुलाब लगती हो, हल्का सा भी मुस्कुरा दो तो, लाज़वाब लगती हो…
हर बार दिल से ये पैगाम आए; ज़ुबाँ खोलूं तो तेरा ही नाम आए; तुम ही क्यूँ भाए दिल को क्या मालूम; जब नज़रों के सामने हसीन तमाम आए.
कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है; कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है; कब तलक बयाँ करूँ दिल की बात; हर सांस में अब तेरा एहसास आ जाता है।
चेहरे पे मेरे जुल्फों को फैलाओ किसी दिन क्यूँ रोज गरजते हो बरस जाओ किसी दिन खुशबु की तरह गुजरो मेरी दिल की गली से फूलों की तरह मुझपे बिखर जाओ किसी दिन।
मंजिल भी तुम हो तलाश भी तुम हो उम्मीद भी तुम हो आस भी तुम हो इश्क भी तुम हो और जूनूँ भी तुम ही हो अहसास तुम हो प्यास भी तुम ही हो।
तेरे सीने से लगकर तेरी आरजू बन जाऊँ तेरी साँसो से मिलकर तेरी खुश्बू बन जाऊँ फासले ना रहें कोई तेरे मेरे दरमिआँ मैं…मैं ना रहूँ बस तू ही तू बन जाऊँ।
तेरा इश्क़ भी महंगाई की तरह है, दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।
न होके भी तू मौजूद है मुझमें क्या खूब तेरा वजूद है मुझमें
तेरे इंतज़ार में मेरा बिखरना इश्क़ है, तेरी मुलाकात पे मेरा निखरना इश्क़ है।