हक़ीक़त ना सही तुम ख़्वाब की तरह मिला करो, भटके हुए मुसाफिर को चांदनी रात की तरह मिला करो।
गर मेरी चाहतों के मुताबिक ज़माने की हर बात होती तो बस मैं होता तुम होती और सारी रात बरसात होती।
मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ।
छू गया जब कभी ख्याल तेरा दिल मेरा देर तक धड़कता रहा कल तेरा ज़िक्र छिड़ गया घर में और घर देर तक महकता रहा।
कभी लफ्ज़ भूल जाऊं कभी बात भूल जाऊं तूझे इस कदर चाहूँ कि अपनी ज़ात भूल जाऊं कभी उठ के तेरे पास से जो मैं चल दूँ जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊं।
कुछ खास नही… इन हाथों की लकीरों में मगर तुम हो तो… एक लकीर ही काफी है.
ये दिल ही तो जानता है मेरी पाक मोहब्बत का आलम, की मुझे जीने के लिए सांसों की नही तेरी ज़रुरत है!!
आज बारिश में तेरे संग नहाना है, सपना ये मेरा कितना सुहाना है, बारिश की बूंदें जो गिरे तेरे होंठों पे, उन्हें अपने होंठों से उठाना है।
वादा है जब भी मुझसे मिलोगे, हर बार इश्क होगा, मोहब्बत पूरी शिद्दत से होगी, प्यार बेपनाह होगा।
अगर मैं हद से गुज़र जाऊं तो मुझे माफ़ करना, तेरे दिल में उत्तर जाऊं तो मुझे माफ़ करना, रात में तुझे देख के तेरे दीदार के ख़ातिर, पल भर जो ठहर जाऊं तो मुझे माफ़ करना!!